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अहांक संग

अहांक संग बिताएल दिन
कतेक छोट होएत छल
तखन दुनिया
कतेक नीक लागैत छल.
आमक...
लतामक गाछी
गेहुंक...
मटरक लहराइत खेत
जतय बितय छल
अपन प्यारक स्वर्णिम क्षण.
अहांक रुसिकय
कुसियारक खेत में छुपि जनाय
हमर बेचैनी अहांके खोजनाय.
मिलला पर ज़ोर हंसि कs भगनाय
दम फुललाs पर दुनु गोटा के
कन्हा पर हाथ धs हाफनाय
अहांके भरिs पांज चिपैट नचनाय
...
एहिठाम बस मे लोकक चिपटनाय
कतेक फर्क अछि...
हम एतय आबि गेलहुं
मुदा हमर मन...
हमर
हंसि
हमर सभ किछु
ओतय रहि गेल
अहिं के पास..
एतय दिन कतेक पैघ लगैत अछि
काटलोs नहिं कटैत
ओतय खेतक एकांतोs मे अहांक संग छल
एतय लाखक भीड़ मे एकसरे
अहां एकरा केना सहैत होएब...

3 comments:

  1. Bhai jee anha ke e kavita gamak yaad jaga bai ye hamra bad ban bhabai ye................. Bastwik men aai kavita ke lel anha ke ham je parsansa karab tahi hetu sabd kam pari rahal aichh....

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  2. apnek kavita wakai me dil ke chhoo lelak. jena lagai ya ki aai pher akhan gano ke gali wo khet, khalihan sabkuchh yaad aabi gel. kavita,k lel bahut bahut dhanyawad.

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